पवित्र पावन रक्षाबंधन

दोस्तों भाई बहन के प्रेम और सौहार्द्र का प्रतीक रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनायें दोस्तों आज के पोस्ट मे कुछ बातें रक्षाबंधन की सावन की रिमझिम फुहार के बीच खुशियों का पर्व रक्षाबंधन हर्ष उल्लास की छटा विखेरने आ गया दोस्तों हमें

इस पर्व का बेसब्री से इंतजार रहता रहता है सुबह से ही घर में मिठे पकवानों की खुशबू फैल जाती है

दोस्तों मानव जीवन रिश्तों का मेला है लेकिन भाई बहन का रिश्ता अतुल्य होता है इस एक रिश्ते कभी प्रेम तो कभी शरारत कभी शिकायत तो कभी सुरक्षा की भावना रहती है फिर चाहे पापा डाट खिलानी हो या माँ की मार से बचाना हो भाई बहन के रिश्ते को और मजबूती प्रदान करने के लिए रेशम का नाजुक सा धागे में इतनी बड़ी शक्ति होती है जो भाई की सुरक्षा करती है मुसीबत तो आती है यह प्रकृति का नियम है लेकिन उस मुसीबत के बीच ढाल बनता है श्रद्धा और शक्ति का प्रतीक नाजुक सा धागा बहन का विश्वास उस धागे में समाई श्रद्धा और दुआएं हर मुश्किल में साथ होती हैं आज सामाजिक दृष्टि कोड़ से देखा जाए जाए तो आज रक्षाबंधन के मायने बदल गए है कहीँ माँ बेटे को राखी बांधती है तो कहीं बहन बहन को लेकिन परस्पर सौहार्द की भावना नही बदली एक दूसरे से बध कर रहने सिद्दत के साथ इह रिश्ते को निभाने की परंपरा आज भी है पाश्चात्य सभ्यता ने हमारे जीवन शैली और सामाजिक मूल्यों को प्रभावित करने लगी है हमारी जड़ो में इतनी मजबूती है आज भी कोई हिला नहीं पाया हमारी सनातन संस्कृतिऔर हमारे रीति रिवाज हमारी धरोहर हैं

आइये बात करते हैं की रक्षाबंधन कब से मनाया जा रहा है इसके पीछे का तथ्य क्या

विष्णु पुराण

दोस्तों विष्णु पुराण में ए बात अंकित है प्रह्लाद के पोते दानव राज वली की बढ़ती शक्तियों से देवताओं में डर बैठने लगा तब देवताओं भगवान विष्णु से प्रार्थना की तव विष्णु जी ने वामन अवतार लेकर राजा से भिक्षा मांगने गये और भिक्षा मे ढाई पग जमीन मांगा राजा ने दे दिया भगवान विष्णु ने दोपग मे सारी सृष्टिको माप लिए तीसरे पैर को कहा रखे तब वली ने अपना सर आगे कर दिया विष्णु जी खुश हुए और वरदान मागने को कहा

वलि ने भगवान को ही माँग लिया विष्णु जी फस गये और उसके रक्षक बन गए इधर वैकुण्ठ धाम में लक्ष्मी जी को चिंता हुई तो उन्होंने नारदजी से चर्चा की तब यह उपाय सूझा की वली को राखी बाँध कर भाई बना ले उपहार में विष्णु जी को माँग ले तब लक्ष्मी जी ने वैसे ही किया और वली को राखी बांधी और विष्णु जी को लेकर वैकुण्ठ धाम चली गयीं उस दिन श्रावण पूर्णिमा थी तब से हम राखी का पर्व मना रहे है

महाभारत काल

महाभारत काल में श्री कृष्ण जी को हाथ में चोट लगी तो द्रौपदी ने आँचल की साड़ी फाड़ कर श्री कृष्ण जी के हाथ में बाँध कर रक्षा का कामना की

श्री मद्भगवतगीता

श्री मद्भगवतगीता में वर्णन किया है कि बहुत दिनों तक देव ताओं और दान वो मे युद्ध हुआ देवता दानवों को पराजित करने में असमर्थ होने लगे तब इंद्र की शची मंत्रों से उच्चारित करके शक्तियों को समाहित कर धागा इंद्र की कलाई पर बाँध दिया तब जाकर देवताओं की युद्ध में विजय हुई यह घटना भी श्रावण पूर्णिमा को हुई

ऐतिहासिक

इतिहास में मेवाड़ की विधवा महारानी कर्णावती ने हुमायूँ को खत केसाथ राखी भेजी थी क्योंकि मेवाड पर बहादुर शाह जफर ने आक्रमण किया था और उस समय मेवाड़ की हालत युद्ध स्तर की नही थी तब मुस्लिम बादशाह होकर भी हुमायूँ ने राखी की महत्व को सम्मान दिया और मेवाड़ की रक्षा की और भी छोटी छोटी लोक कथाएं हैं जो रक्षाबंधन का वर्णन करती है

रक्षाबंधन के पर्व को लेकर 2022 में थोड़ा कंफ्यूजन बन गया था लेकिन हमारे ज्योतिष वि और आचार्यों ने यह बात साफ कर दी है बहुत महत्व पूर्ण होता है रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त

काशी हिन्दू विश्व विद्यालय ज्योतिषाचार्यो ने बैठक करके निवारण निवारण किया है बीएचयू ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष प्रो गिरिजा शंकर शाश्त्री ने विद्वानों की राय का शास्त्रीय विवेचन कर निष्कर्ष निकाला है पूर्णिमा की तिथि 11अगस्त को सुबह 9.35 बजे लग जाएंगी 12अगस्त को सुबह 7.17बजे तक रहेगी

11अगस्त को सुबह 9.35बजे से भद्रा लग जाएं गीऔर रात 8.35बजे तक रहेगी इसके बाद रक्षाबंधन मना सकते हैं वही 12अगस्त को सुबह 5.30बजे से 7.17बजे तक राखी बांधी जा सकती है पूर्णिमा काल बीतने के बाद भी पूरा दिन शुभ योग है

धर्म ग्रंथों में भद्रा कल में राखी बाधना वर्जित है अतः शुक्रवार को पूरा दिन शुभ योग है राखी बाँधने के लिए

इतना डर क्यों भद्रा कौन हैं

दोस्तों भद्रा न्याय के देवता शनि महाराज की बहन है जो सूर्य र छाया की पुत्री है जब भद्रा का जन्म हुआ तब भयानक चेहरा लम्बा बाल नुकीले दाँत सारे संसार को खाने दौड़ पड़ी देवता भी डर गए भद्रा ने पूजा पाठ यज्ञ और शुभ कार्यों में बाधा उत्पन्न कर सब नष्ट करने लगी तब ब्रह्मा जी ने करणो सातवाँ स्थान दिया जिसे विष्टी भी कहते हैं ब्रह्मा जी ने कहा यह तुम्हारा समय है इह तुम्हारे समय में जो भी शुभ कार्य करेगा उसे तुम नष्ट कर देना बाकी समय को छोड़ दो और शांत होकर रहो भद्रा ने ब्रह्मा जी की बात मान ली इस लिए दोस्तों ।भद्रा को बहुत ही खतरनाक माना जाता है तो भद्रा काल में कोई शुभ कार्य यात्रा आदि नकरे

रक्षा बंधन का मंत्र

येन बध्दो बलि राजा ,दान बेन्द्रो महाबलः

तेन त्वाम् प्रतिबद्ध नामि रक्षे माचल माचल

इसका अर्थ

जिस रक्षा सूत्र से महादानी राजा वलि को बाँधा गया है मै तुम्हे उसी रक्षा सूत्र से बाँध ती हूँ जो तुम्हारी रक्षा करेगा

चंदन लगा ने का मंत्र

ओम् चन्दनस्य,महत्व पूर्ण ,पवित्रं

पापनाशनम , आपदं,हरते ,नित्यम् लक्ष्मी स्तिष्ठति सर्वदा

सिंदूर लगाने का मंत्र

सिंदूरं सौभाग्य वर्धनम् पवितम् पाप ना शनम्

आपदं हरते नत्यं लक्ष्मी स्तिष्ठति सर्वदा ।

तो दोस्तों यह पोस्ट आप को कैसी लगी कॄपया अपनी प्रक्रिया जरूर दे रक्षा बंधन की ढेर सारी शुभकामनाएं खुशियाँ आपको

🙏ओम् नमः शिवाय 🙏

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One Thought to “पवित्र पावन रक्षाबंधन”

  1. Ashwin pandey

    HAPPY RAKSHABANDHAN AAP SABHI KO ♥️📿📿

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